कविता कोश के तीन वर्ष

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कविता कोश आज तीन वर्ष का हो गया है। हिन्दी काव्य का यह ऑनलाइन कोश इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है सामूहिक प्रयासों द्वारा किसी भी कठिन और विशाल लक्ष्य को पाया जा सकता है। कविता कोश साहित्य के भविष्य का भी दर्पण है। इस कोश में संकलन के द्वारा ना केवल दुर्लभ और लुप्त होती कृतियों को बचाया जा रहा है बल्कि ये कृतियाँ सर्व-सुलभ भी हो रही हैं। रचनाकार कविता कोश में अपनी रचनाओं के संकलन के बाद संतुष्टि का अनुभव करते है कि उनकी रचनाएँ समस्त विश्व में पढी़ जा सकती हैं और सुरक्षित व सुसंकलित हैं। इस तीसरे वर्ष में भी कोश तीव्र गति से आगे बढा़। इसी प्रगति की संक्षिप्त जानकारी नीचे दी जा रही है।
==आंकडो़ की नज़र से==
<table width=80% align=center cellpadding=6 style=”border:1px solid #c5c5c5; background-color:#f9f9f9″>
<tr bgcolor=”#c5c5c5″><td></td><td align=center>”’पहले वर्ष में”'</td><td align=center>”’दूसरे वर्ष में”'</td><td align=center>”’तीसरे वर्ष के अंत तक”'</td></tr>
<tr><td>”’संकलित रचनाकारों की संख्या”'</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>200</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>390</td>
<td bgcolor=”#e5e5e5″>”’980”'</td>
</tr>
<tr><td>”’कोश में उपलब्ध कुल पन्ने”'</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>3,000</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>>10,000</td>
<td bgcolor=”#e5e5e5″>”’~20,000”'</td>
</tr>
<tr><td>”’कोश के जालस्थल पर हर महीने आने वाले आगंतुकों की संख्या”'</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>5,000</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>>17,000</td>
<td bgcolor=”#e5e5e5″>”’>50,000”'</td>
</tr>
<tr><td>”’हर महीने देखे जाने वाले पन्नो की संख्या”'</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>70,000</td>
<td bgcolor=”#f0f0f0″>>200,000</td>
<td bgcolor=”#e5e5e5″>”’>700,000”’ (जून 2009)</td>
</tr>
</table>

कविता कोश पाँच जुलाई को तीन वर्ष का हो गया। हिन्दी काव्य का यह ऑनलाइन कोश इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है सामूहिक प्रयासों द्वारा किसी भी कठिन और विशाल लक्ष्य को पाया जा सकता है। कविता कोश साहित्य के भविष्य का भी दर्पण है। इस कोश में संकलन के द्वारा ना केवल दुर्लभ और लुप्त होती कृतियों को बचाया जा रहा है बल्कि ये कृतियाँ सर्व-सुलभ भी हो रही हैं। रचनाकार कविता कोश में अपनी रचनाओं के संकलन के बाद संतुष्टि का अनुभव करते है कि उनकी रचनाएँ समस्त विश्व में पढी़ जा सकती हैं और सुरक्षित व सुसंकलित हैं।

इस वर्ष कोश के विकास में हाथ बंटाने वाले कुछ प्रमुख योगदानकर्ता रहे – संपादक अनिल जनविजय जी, सदस्य द्विजेन्द्र ‘द्विज’ जी, हेमंत जोशी, श्रद्धा जैन, चंद्र मौलेश्वर, हिमांशु, राजुल मेहरोत्रा, विनय प्रजापति, एकलव्य, भारतभूषण तिवारी”’ और ऋषभ देव शर्मा

पिछले वर्ष कविता कोश में हुई प्रगति पर एक संक्षिप्त आलेख तैयार किया गया है। इसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

प्रतिष्ठा शर्मा

प्रशासक, कविता कोश टीम

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6 Responses to “कविता कोश के तीन वर्ष”

  1. यूनुस खान Says:

    कविता-कोश को असंख्‍य बधाईयां ।
    कविता-कोश से एक अलग ही तरह का अनुराग रहा है ।
    ये और प्रगति करे ।
    हम कविता-कोश के साथ हैं ।

  2. anil kant Says:

    ढेरों बधाईयाँ …

  3. प्रियंकर Says:

    बड़े भाग ले यह घड़ी पास आई , बधाई तुम्हें हो बधाई बधाई !

  4. अनुनाद Says:

    बधाई हो।

    कविताकोश की सफलता हमे यह सन्देश भी देती है कि हम हिन्दी के लिये हमेशा कुछ नया करने या कर गुजरने का स्वप्न देखते रहें। इसी तरह के नये-नये हिन्दी प्रकल्प आरम्भ करने और उन्हें पूरा करने से हिन्दी का हित सधेगा। हिन्दी विकिपीडिया एक सुपरिचित प्रकल्प है जिसमें अधिक से अधिक लोगों को हाथ बटाना चाहिये।

  5. संगीता पुरी Says:

    बहुत बहुत बधाई !!

  6. Saralhindi Says:

    Why not show Kavita Kosh in Nagari-Gujarati Script?
    or
    Why not add a Gujarati script converter to the site?

    As you know that Gujarati Script is a simplified version of Devnagari script
    without horizontal lines. In fact it’s a developed Devnagari script where you write comparatively lesser times lifting the pen.

    Sure,Hindi is spoken by more peoples in India but it’s not technical and very cluttered language with horizontal lines.It’s writings in newspapers look like an old Sanskrit language.If you look all Indian languages in Google Transliteration IME you will find Gujarati script very simple computer-usable language Script.Gujarati alphabet is very very easy for foreigners to learn and practice.

    We all know that Devnagari is not the script of Hindi to begin with.Basically it is the script of Sanskrit,unquestionably the language of India,not any region.

    Sanskrit language used horizontal lines for grammatical lengthy meaningful words.

    Besides languages in a Devnagari script which Indian old or current languages or world languages use horizontal lines to make words more cluttered in appearance?Why draw lines if not needed?

    As you know China has simplify it’s language to make it computer usable.Also most of European countries and other world countries use English Script for their national languages.

    Think,Why most Hindi lyrics are written in English but not in Hindi?

    People don’t mind learning Hindi but India needs one easy Script for all languages and that’s Gujarati Script.

    Please do express your opinion about this.

    http://saralhindi.wordpress.com/

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