गुफ़्तगू अवाम से है

by

शेर मेरे हैं सभी ख़्वास पसंद

पर मुझे गुफ़्तगू अवाम से हैमीर

नये वर्ष में इस बार कविता कोश अन्य बहुत-सी रचनाओं के साथ-साथ, यथार्थ और कल्पनाशीलता, परम्परा और आधुनिकता का दुर्लभ संगम प्रस्तुत करते हुए ग़ज़ल को नया मुहावरा प्रदान करने और ग़ज़ल की अर्थवता की वृद्धि में अपना विशिष्ट योगदान देने वाले और सिर्फ़ उँगलियों पर गिनाए जा सकने वाले ग़ज़लकारों में अग्रणी ज्ञानप्रकाश विवेक की बहुत-सी ग़ज़लें जुटा लाया हैतग़ज़्ज़ुल और शेरियत के भरपूर फ़्लेवरों से युक्त उनकी ग़ज़लों के ये शेर देखिए :

वो कोई और नहीं दोस्तो ! अँधेरा है

दीया सिलाई जलाकर खड़ा है हँसता हुआ

पोस्टर सारे पुराने हो गये माहौल के

जाने कब बदली हुई आबो-हवा लाएँगे लोग

मोम की तार में अंगारे पिरो दूँ यारो

मैं भी कर गुज़रूँ कोई काम दिखाने वाला

वो तितलियों को सिखाता था व्याकरण यारो !

इसी बहाने गुलों को डरा के रखता था

हवाएँ पूछती फिरती हैं नन्हे बच्चों से

ये क्या हुआ कि पतंगें उड़ाना छोड़ दिया

पेश करते हैं दुख को शगल की तरह

चैनलों को न जाने ये क्या हो गया

अलमारी में रख आओ गये वक़्त की एलबम

जो बीत गया उसको भुला क्यों नहीं देते

ज्ञानप्रकाश विवेक की और भी बहुत-सी ग़ज़लें पढ़िए कविता कोश में हाल ही जुड़े  उनके ग़ज़ल संग्रह गुफ़्तगू अवाम से है में , अभी , इसी वक़्त।

नव वर्ष के लिए मंगल कामनों सहित

सादर

द्विजेन्द्र “द्विज”

Advertisements

3 Responses to “गुफ़्तगू अवाम से है”

  1. Anil Kant Says:

    काबिले तारीफ लेख …मजा आ गया

    अनिल कान्त
    मेरा अपना जहान

  2. विनय Says:

    मज़ा आ गया

    —आपका हार्दिक स्वागत है
    गुलाबी कोंपलें

  3. poonam Says:

    really it’s an amazing writing, I also like to write poems and hope one day I will be also able to write like you.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: