आप में से बहुत से व्यक्तियों ने आल्हा रेडियो पर सुना होगा। जिस ऊर्जा और उत्साह के साथ आल्हा और ऊदल की वीर-गाथाओं को हमारे लोक-गायक गाते रहे हैं उससे इस छंद को सुनने का आनंद दूना हो जाता है।
बहुत समय से पाठकों की यह मांग रही है कि कविता कोश में आल्हा शामिल किया जाये। लेकिन यह छंद कहीं मिल नहीं रहा था। अब आखिरकार श्री योगेन्द्र सिंह के योगदान के कारण भोजपुरी में लिखे गये आल्हा का एक हिस्सा कोश में संकलित हो पाया है। सभी पाठकों की ओर से हम श्री योगेन्द्र सिंह को धन्यवाद देते हैं। इस आल्हा को पढने के लिये यहाँ क्लिक करें।
श्री योगेन्द्र सिंह ने और भी ऐसी रचनाएँ भेजने के लिये कहा है। आप देख सकते हैं कि सभी के द्वारा थोड़ा-थोड़ा योगदान भी इस तरह की अनमोल और दुर्लभ रचनाओं को किस तरह खो जाने से बचा सकता है। आपसे अनुरोध है कि इसी भावना के तहत कविता कोश के विकास में सहायता करें।
कविता कोश टीम
February 4, 2009 at 9:03 am |
हमारी लोक सम्पदा का संरक्षण आवश्यक है हमारे लिये. इस दिशा में कविता-कोश का यह कदम सराहनीय है. आभार
February 4, 2009 at 11:23 am |
Bahut bahut aabhaar…..