कविता कोश हमेशा आपके लिये उत्कृष्ट काव्य जुटाता रहा है। कविता कोश मे हाल ही में श्री सुरेश चन्द्र ‘शौक़’ की ग़ज़लें संकलित हुई हैं।
‘तेरी खुश्बू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे’ जैसी नज़्म के सुप्रसिद्ध शायर श्री राजेन्द्र नाथ रहबर ने श्री सुरेश चन्द्र ‘शौक़’ के ग़ज़ल संग्रह “आँच” की भूमिका में लिखा है :
” सुरेश चंद्र ‘शौक़’ साहिब की शायरी किसी फ़क़ीर द्वारा माँगी गई दुआ की तरह है जो हर हाल में क़बूल हो कर रहती है. ”
सुरेश चंद्र शौक़ साहिब के ये शेर देखिए :
ज़ियादा चुप ही रहे वो कभी— कभी बोले
मगर जो बोले तो ऐसे कि शाइरी बोले
इतने भी तन्हा थे दिल के कब दरवाज़े
इक दस्तक को तरस रहे हैं अब दरवाज़े
शहर फूँकने वालो ! यह ख़याल भी रखना
दोस्तों के घर भी हैं दुश्मनों की बस्ती में
इस दौरे—सियासत में हर कोई ख़ुदा ठहरा
रखिए भी तो किस किस की दहलीज़ पे सर रखिए
तू वो न देख दिखाती है अक़्स जो दुनिया
तू देख वो जो दिखाता है आइना दिल का
आशा है आपको यह प्रस्तुति पसंद आएगी और आप इन ग़ज़लों का आनंद उठाएंगे।
September 20, 2008 at 5:10 pm |
बेहतरीन।
September 20, 2008 at 8:53 pm |
बहुत सही…साधुवाद!!
September 22, 2008 at 6:19 am |
शौक़ साहेब को कविता कोश मे शामिल करने का धन्यावाद, एक और शायर पढ़ने को मिलेगा.