लिपट जाता हूँ माँ से — मुनव्वर राना

By kavitakosh

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है
मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है
मुनव्वर राना

हिन्दी काव्य के महासागर कविता कोश में पढ़िये सुपरिचित शायर मुनव्वर राना की पुस्तक माँ में संग्रहित के ये अप्रतिम शे’र :

घर की दहलीज़ पे रौशन हैं वो बुझती आँखें
मुझको मत रोक मुझे लौट के घर जाना है

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

मैदान छोड़ देने से मैं बच तो जाऊँगा
लेकिन जो यह ख़बर मेरी माँ तक पहुँच गई

‘मुनव्वर’! माँ के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमीं अच्छी नहीं होती

इन सुन्दर शे`रों की अद्वितीय भाव-प्रवणता और भाव-सम्पन्नता की उद्दात लहरों का आकर्षण आपको इस काव्य कृति के सागर की गहराइयों में बार-बार डुबकी लगाकर ‘माँ’ पर विभिन्न  काव्य मोती निकाल लाने को अवश्य विवश करेगा।

मुनव्वर राना साहब ने यह पुस्तक हर उस बेटे को समर्पित की  है जिसे माँ याद है.

माँ के साथ बुज़ुर्ग, भाई, बहन, बेटी तथा और भी कई विषयों पर मुनव्वर राना के विभिन्न शे`रों का संकलन ‘माँ’ पढ़ने के लिए आइये चलें कविता कोश के महासागर में।

प्रस्तुति

द्विजेन्द्र द्विज

4 Responses to “लिपट जाता हूँ माँ से — मुनव्वर राना”

  1. neeraj1950 Says:

    नतमस्तक हूँ मुनव्वर जी के इन शेरों के आगे…माँ पर उनसे बेहतर उर्दू शायरी में और कहीं शेर देखने को नहीं मिलते. बिना थोथी भावुकता के वो ऐसे नायाब शेर निकालते हैं की तबियत बाग बाग हो जाती है… आँखें नम और मुंह से बरबस वाह वा…निकल पड़ती है. ये शेर जब वो अपने अंदाज़ में सुनते हैं तो देखते ही बनता है…मेरे पास एक मुशायरे की विडियो सी.डी. है जिसमें उन्होंने लगभग ये सभी शेर सुनाएँ है….
    ऐसे बेमिसाल शायर को मेरा फर्शी सलाम.
    नीरज

  2. सुशांत झा Says:

    कुछ और भी है–
    किसी को घर मिला हिस्से में या दुकां आई
    मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में मां आई..
    जब भी कश्ती मेरी तूफान में आ जाती है..
    मां दुआ करती हुई, ख्वाब में आ जाती है…

  3. समीर लाल Says:

    मुनव्वर राना जी की बात जुदा है!! आभार इस प्रस्तुति का.

  4. Roopak Batish Abhinay Says:

    bahut dil khush hooya achhi soch se

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