आज हम कविता कोश की स्थापना का चौथा वर्ष पूरा कर रहे हैं। हिन्दी काव्य का यह ऑनलाइन कोश इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है सामूहिक प्रयासों द्वारा किसी भी कठिन और विशाल लक्ष्य को पाया जा सकता है। कविता कोश साहित्य के भविष्य का भी दर्पण है। इस कोश में संकलन के द्वारा ना केवल दुर्लभ और लुप्त होती कृतियों को बचाया जा रहा है बल्कि ये कृतियाँ सर्व-सुलभ भी हो रही हैं। रचनाकार कविता कोश में अपनी रचनाओं के संकलन के बाद संतुष्टि का अनुभव करते है कि उनकी रचनाएँ समस्त विश्व में पढी़ जा सकती हैं और सुरक्षित व सुसंकलित हैं। इस तीसरे वर्ष में भी कोश तीव्र गति से आगे बढा़। इसी प्रगति की संक्षिप्त जानकारी नीचे दी जा रही है।
- > 30,000 संग्रहित रचनाएँ
- > 100,000 आगंतुक हर महीने आते हैं
- > 1.5 million पन्नें हर महीने देखे जाते हैं
- > 40 million हिट्स प्रति माह
- > 3700 फ़ैन्स हैं फ़ेसबुक पर
- > 80 नियमित योगदानकर्ता
- > 4500 पंजीकृत प्रयोक्ता
कविता कोश के विकास में हाथ बंटाने के उद्देश्य से कोश से जुड़ने वाले योगदानकर्ताओं की संख्या इस वर्ष भी निरंतर बढ़ती रही। साथ ही पुराने योगदानकर्ताओं ने भी अपना योगदान बनाये रखा। इस वर्ष कविता कोश टीम में संपादक श्री अनिल जनविजय ने सर्वाधिक योगदान करते हुए कोश में 10,000 पन्नें बनाने का आंकडा पार कर लिया। कोश से नए जुड़े कर्मठ योगदानकर्ता धर्मेंद्र कुमार सिंह ने तेज़ी से योगदान करते हुए 3000 से अधिक पन्नों का निर्माण किया। कविता कोश टीम के सदस्य श्री द्विजेन्द्र ‘द्विज’ ने ग़ज़ल और नज़्म विधा की रचनाओं को जोड़ने और उर्दू के कठिन शब्दों के अर्थ कोश में शामिल करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। प्रसिद्ध ग़ज़लकारा श्रद्धा जैन अपने पिछले वर्ष के सक्रिय योगदान को आगे बढ़ाते हुए कोश में 1000 पन्नें जोड़ने वाली सातवीं योगदानकर्ता बनीं। अन्य प्रमुख योगदानकर्ताओं में प्रदीप जिलवाने, विभा झलानी, हिमांशु पाण्डेय, राजीव रंजन प्रसाद, अजय यादव, संदीप कौर सेठी, मुकेश मानस, नीरज दइया और वीनस केशरी के नाम शामिल हैं।
नित नये योगदानकर्ताओं के कोश से जुड़ने का सिलसिला बदस्तूर ज़ारी है। इन सभी योगदानकर्ताओं के श्रम के कारण ही आज कविता कोश अपने वर्तमान स्वरूप को पा सका है। आप भी कोश के विकास दे सकते हैं -इसके लिये नये आगंतुकों का स्वागत देंखें।
सादर
प्रतिष्ठा शर्मा
प्रशासक, कविता कोश टीम
कविता कोश की स्थापना को लगभग साढ़े तीन वर्ष हुए हैं। इतने कम समय में कोश हिन्दी सहित्य जगत में एक स्थापित तथा लोकप्रिय नाम बन चुका है। आज मुझे यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि अब कोश में उपलब्ध पन्नों की संख्या 25,000 के ऊपर पँहुच गयी है। अभी कुछ ही देर पहले कोश ने यह मील का पत्थर पार किया। हर 5,000 रचनाओं के जुड़ने को कविता कोश में एक मील का पत्थर माना जाता रहा है। साढ़े तीन वर्ष के कम समय में 25,000 पन्नों का संकलन अपने आप में एक उपलब्धि है। अब कविता कोश के विषय में अधिक कुछ बताने की आवश्यकता नहीं रह गयी है। यह हिन्दी काव्य का इंटरनेट पर उपलब्ध सबसे बड़ा कोश बन चुका है और इंटरनेट को प्रयोग करने वाले तकरीबन सभी हिन्दी काव्य प्रेमी इसके बारे में जानते हैं और इसका प्रयोग करते हैं।











